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प्राचीन और आधुनिक अक्षरों के बीच का भेद

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मोडी लिपी सिखते हुए लेखनका अभ्यास करते समय अक्षरोंका आकर अनुरूप हो, अक्षर सुंदर ना सही किंतू सुवाच्य हो जैसी बातों पर हम द्यान देते है । बोरू या कट्‌ निब पेन से लेखन करते है । लेकिन ऐतिहासिक दस्तावेजोंका अक्षर ध्यान से देखें तो हमारा मोडी लेखन का सराव और उस दस्तावेजों के मोडी अक्षर में बहुत अंतर दिखाई देता है ।

नीचे दी गई तस्वीर मे दिया लेखन देखिए:

दस्तावेजमें अगर गांव का नाम, हिंदू या इसा सदी कि तारीख जैसे संदर्भभी उपलब्ध हो, तो शीघ्र लेखनका भी तत्काल आकलन हो सकता है । किंतु ऐसी एक छोटीसी पंक्ति अगर अक्षर-पहचान के लिए सामने आती है तो हम अभ्यास कर रहे मोडी अक्षरोंकी लिखावट की तुलना में उपरकी पंक्ति के अक्षरोंकी शैली भिन्न होने के कारण अक्षर पहचानने में कठीनाई हो सकती है । जिस वजह से उपर दिए शब्दों का भिन्न लिप्यंतर तथा अनुवाद हो सकता है । कभी कभार अंक भी अक्षर के समान दिखाई दिए जा सकते हैं । लेखन पढते समय एक और बात ध्यान में आती है कि लेखनिकका मूल अक्षर सुंदर है । लेकिन मोडी लेखन करते समय लपेटीदार लेखनशैली की वजह से हाथ को गती मिलती है और उस गती के साथ समतोल रखते हुए अक्षरोंकी लिखावट में परिवर्तन आया है ।

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